आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मिजोरम में 2025 में तपेदिक (टीबी) से कुल 145 लोगों की मौत हुई है, जो छह वर्षों में सबसे अधिक मौतें हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मिजोरम के तहत राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अनुसार, वर्ष के दौरान 911 महिलाओं सहित कुल 2,275 लोगों में इस बीमारी का निदान किया गया, जो 2024 के 2,291 मामलों के रिकॉर्ड से मामूली कमी है।
इसमें कहा गया है कि 2,275 नए मामलों में से 1,900 सरकारी सुविधाओं में पाए गए, जबकि शेष 375 मामले निजी केंद्रों में पाए गए।
राज्य में 2020 से टीबी से होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि हुई है। जहां 2020 में 31 लोगों की मौत हुई, वहीं 2021 में मौतों की संख्या बढ़कर 46, 2022 में 87, 2023 में 119 और 2024 में 136 हो गई।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में पाए गए 2,275 नए मामलों में से 146 लोगों में मल्टी-ड्रग-प्रतिरोधी तपेदिक (एमडीआर-टीबी) का निदान किया गया, और 267 लोग टीबी और एचआईवी एड्स दोनों से पीड़ित पाए गए।
नये मरीजों में 141 मरीज 14 साल से कम उम्र के थे। कुल मिलाकर 84 प्रतिशत मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया।
आइजोल जिले में सबसे अधिक 1,569 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद लुंगलेई में 155 और कोलासिब में 138 मामले दर्ज किए गए। सेरछिप जिले में सबसे कम 52 मामले दर्ज किए गए।
अधिकारियों ने बताया कि पीएम टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 100 से अधिक लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘निक्षय’ के माध्यम से टीबी रोगियों को गोद लेने या उनके लिए दान करने के लिए पंजीकरण कराया है।
उन्होंने कहा, यह टीबी को खत्म करने की भारत की प्रतिबद्धता को पूरा करने और मरीजों के इलाज के परिणामों में सुधार के लिए अतिरिक्त रोगी सहायता प्रदान करने और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) गतिविधियों का लाभ उठाने में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का एक कार्यक्रम है।

