डिजिटल गिरफ्तारी भारत में साइबर अपराध का सबसे कुटिल रूप बनकर उभरा है। यह न केवल देश की वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए बल्कि कानून प्रवर्तन मशीनरी में जनता के विश्वास के लिए भी खतरा है। डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों की देशव्यापी जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला समय पर किए गए हस्तक्षेप का प्रतीक है। सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में अपराधों की जांच के लिए सीबीआई को सहमति दें। अदालत ने इस अपरिहार्य वास्तविकता को स्वीकार किया है कि साइबर अपराधी राज्य की सीमाओं की उपेक्षा करते हैं, यहां तक कि खंडित जांच केवल परिष्कृत सीमा पार नेटवर्क को बढ़ावा देती है।

