घरेलू उत्पादकों को घाटे से बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सेब उत्पादक अमेरिकी सेब पर प्रस्तावित शुल्क रियायत के खिलाफ अगले महीने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
भारत ने अंतरिम व्यापार समझौते के तहत सेब पर अमेरिका को कोटा-आधारित शुल्क रियायत दी है। अमेरिका से सेब बिना किसी आयात शुल्क के भारतीय बाजार में प्रवेश करेगा।
उत्पादकों को आशंका है कि अमेरिका से सेब भारतीय बाजार में आ जाएंगे और इससे घरेलू किसानों को बड़ा झटका लगेगा।
कुलगाम के विधायक और ट्रेड यूनियन नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने यहां संवाददाताओं से कहा, “हमने कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों को शामिल करते हुए एक भारतीय सेब किसान महासंघ (एएफएफआई) का गठन किया है। हमने (व्यापार समझौते के खिलाफ) मार्च में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।”
तारिगामी ने कहा कि एएफएफआई ने संयुक्त किसान मोर्चा से देश के सेब किसानों के साथ एकजुटता से खड़े होने की अपील की है, जो अपनी आजीविका पर हमले का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “एक साल से अधिक समय तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार को तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने महासंघ को आश्वासन दिया है कि वह विरोध का समर्थन करेगा। उन्होंने वादा किया है कि उनका नेतृत्व विरोध प्रदर्शन में शामिल होगा।”
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर तारिगामी ने कहा कि यह व्यावहारिक रूप से अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण है।
उन्होंने कहा, “आपको पता होगा कि इस व्यापार समझौते में अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अगर हमारे देश को कुछ खरीदना है, तो हमें अमेरिका की इच्छाओं पर विचार करना होगा, हम व्यापार के संबंध में अपने निर्णयों में संप्रभु नहीं होंगे।”
कुलगाम के विधायक ने कहा कि सेब उद्योग कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
उन्होंने कहा, “जम्मू में छोटी औद्योगिक इकाइयां हैं लेकिन हमारे यहां ज्यादा नहीं हैं। हमारे पास हस्तशिल्प था लेकिन वे भी गिरावट में हैं। हमारी आखिरी उम्मीद सेब है लेकिन अब हम अमेरिकी सेब से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते।”

