पीजीआईएमएस-रोहतक में मनोचिकित्सा विभाग में नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. जोगिंदर सिंह कैरो को हाल ही में ग्रेटर नोएडा में आयोजित 51वें राष्ट्रीय नैदानिक मनोविज्ञान सम्मेलन के दौरान इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजी (आईएसीपी) की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य के रूप में नामित किया गया था।
कैरो ने कहा, “सम्मेलन के इस वर्ष के संस्करण का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने किया और अध्यक्षता पूर्व आईएसीपी अध्यक्ष डॉ. गौरी शंकर कलैया ने की। देश भर के विशेषज्ञों ने ‘मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका’ विषय पर अपने विचार साझा किए।” उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली के कारण तनाव, अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक विकार बढ़ रहे हैं और कहा कि एआई-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म इन स्थितियों के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “किसी व्यक्ति की भावनाओं, व्यवहार और भाषा के आधार पर, डिजिटल एआई प्लेटफॉर्म तनाव, अवसाद और चिंता जैसे मनोवैज्ञानिक विकारों के शुरुआती लक्षणों का पता लगाने में सक्षम हैं। इससे समय पर परामर्श और उपचार संभव हो सकेगा।”
डॉ कैरो ने स्पष्ट किया कि एआई केवल एक सहायक उपकरण है और मानवीय संवेदनशीलता, सहानुभूति और नैदानिक समझ की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग को रोकने और मरीजों का भरोसा बनाए रखने के लिए डेटा गोपनीयता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

